It सिविल वादों का विचारण ( दीवानी प्रकृति के वादों का विचारण ) - CHAMARIA LAW CLASSES

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Thursday, December 28, 2023

सिविल वादों का विचारण ( दीवानी प्रकृति के वादों का विचारण )

 


धारा 9 :- जब तक अन्यथा वर्जित ना हो सभी सिविल न्यायालय सिविल वादों का विचारण करेंगे |


सिविल न्यायालय की अधिकारिता ( सिविल वादों का विचारण )से क्या अर्थ है ?

सभी न्यायालय दीवानी प्रकृति के सभी वादों का विचारण ( सिविल वादों का विचारण ) करने का क्षेत्राधिकार रखेंगे केवल उन वादों को छोड़कर जिनका संज्ञान अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से वर्जित है |

स्पष्टीकरण 1 :- यदि वाद में संपत्ति या पद संबंधी अधिकार विवादित है और ऐसा अधिकार धार्मिक कृत्यों के प्रश्नों के विनिश्चय पर निर्भर है तो वह दीवानी प्रकृति का होगा |

स्पष्टीकरण 2 :- इस धारा के स्पष्टीकरण एक के प्रयोजन के तू यह बात महत्वहीन है कि पद के साथ कोई फीस जुड़ी है या नहीं या पद विशेष स्थान से जुड़ा है या नहीं |

(NOTE) :-  यह स्पष्टीकरण 1976 के संशोधन द्वारा जोड़ा गया है |

 ELEMENT (तत्व)

  • दीवानी (सिविल ) प्रकृति का वाद दीवानी प्रकृति का हो | 
  • ऐसे वाद का संज्ञान अभिव्यक्त या विवक्षित रूप से वर्जित ना हो | 

दीवानी प्रकृति का वाद क्या है ?


 ऐसा वाद  जिसमे  मुख्य प्रश्न दीवानी अधिकारों के निर्धारण और प्रवर्तन से संबंधित है |  (धारा 9 स्पष्टीकरण 1)

 दीवानी प्रकृति के वाद कौन-कौन से हैं ?


संपत्ति संबंधी अधिकार पूजा करने का अधिकार, धार्मिक जुलूस का अधिकार, भागीदारी, लेखा, अब तक की क्षतिपूर्ति संविदा भंग विवाह विच्छेद या दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना किराए पर वेतन स्थाई व्या देश प्रबंधन विशिष्ट अनुतोष जन्मतिथि में सुधार विद्युत बिल में भिन्नता संबंधी वाद दीवानी प्रकृति के हैं

दीवानी प्रकृति के वाद कौन-कौन से नहीं है ?


जाति संबंधी प्रश्नों से अंतर ग्रस्त, राजनीतिक प्रश्न ,लोक नीति के विरुद्ध, केवल गरिमा व सम्मान बनाए रखना, अधिनियम द्वारा वर्जित, औद्योगिक विवाद, विशुद्ध रूप से धार्मिक अधिकार व अनुष्ठान संबंधी जहां वैकल्पिक उपचार उपलब्ध हो, संबंधित वाद दीवानी प्रकृति के नहीं है |

 अभिव्यक्त रूप से वर्जित से क्या अभिप्राय है ?


 जब कोई वाद प्रचलित या लागू किसी अधिनियम द्वारा वर्जित किया गया हो जैसे - रेवेन्यू कोर्ट, दंड प्रक्रिया संबंधी मामले, चुनाव अधिकरण, औद्योगिक अधिकरण, आयकर अधिकरण आदि |

 गर्भित रूप से वर्जित से क्या अभिप्राय है ?


जब कोई वाद विधि के सामान्य सिद्धांत के अंतर्गत वर्जित हो |

(NOTE) :-वैकल्पिक उपचार में क्षेत्राधिकार गर्भित रूप से वर्जित है |


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