CIVIL PROCEDURE CODE, 1908 ( डिक्री(Decree),वाद या दावा CIVIL SUIT

Adv. Madhu Bala
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SEC.1 :- 

नागालैंड और जनजाति क्षेत्रों के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर इस संहिता के प्रावधान लागु होते हैं |

DEFINITIONS :-SEC :2


Sec:- 2(2) डिक्री(Decree) - 

न्याय निर्णयन की औपचारिक  अभिव्यक्ति जो वाद में विवादग्रस्त विषयो के

संबधं में पक्षकारो के अधिकारों का निष्चयात्मक अवधारण करे |

Qus. डिक्री में क्या शामिल हैं ?

Ans   वाद-पत्र का खारिज किया जाना,धारा 144 के अन्तर्गत प्रश्न का अवधारण |

Qus. डिक्री में क्या शामिल नहीं  हैं ?

Ans  चूक के कारण खारिज का आदेश और ऐसा निर्णय जिसकी अपील आदेश की तरह हो |{Sec 2(2)परन्तुक}

Qus   प्रारम्भिक डिक्री क्या हैं ?

Ans    वाद को पूर्ण रूप से निपटाने से पहले आगे ओर कार्यवाही की जानी शेष हो | 

Qus    अन्तिम डिक्री क्या हैं ?

Ans     जब वाद का पूर्ण रूप से निपटारा हो जाए और कोई कार्यवाही शेष न रहे | 

वाद या दावा 


ऐसीे कार्यवाही जो वादपत्र प्रस्तुत करने पर शुरू हो दावा कहलाती हैं | 

{Hansaraj V/S Dhehradun Masuri Electric Trmway Company}


निश्च्यात्मक अवधारण 


न्यायालय का निर्णय यदि अन्तिम होता हैं तो वह निश्च्यात्मक अवधारण हैं | 


Sec 2(3):- डिक्रीदार :- 

जिसके पक्ष में डिक्री पारित की गयी हैं या निष्पादन योग्य आदेश पारित किया गया हैं | 

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